भैया की मदद से भाभी की चुदाई

यह बात हैं मेरी और मेरे चाचा के बेटे अनिल की. और अनिल की बीवी निर्मला की. अनिल और मेरी उम्र लगभग सेम हैं और हम लोग एक ही  क्लास में पढ़ते भी थे. और तो और हम लोग जवान हुए तो ब्ल्यू फ्लिमस भी साथ में देखते थे और एक ही रंडी की चूत भी मारते थे. वो पढने में मुझ से थोडा विक था इसलिए उसने बी.कोम किया और मैं यहाँ दिल्ली में चार्टर्ड अकाउंटेंट हूँ. मेरी शादी तब नहीं हुई थी जब यह चुदाई हुई.

अनिल की शादी निर्मला से तय हुई उसके बाद वो मुझे एक दो बार अपने ससुराल वाले गाँव ले के गया था. मैंने निर्मल भाभी को पहली बार देखा तभी अनिल से कहा के तुझे बड़े मजे आयेंगे भिडू शादी के बाद. वो लोग पार्क भी मेरे और निर्मला भाभी की एक सहेली के साथ जाते थे. वो लोग हमें साइड में बिठा के कौने में चुम्माचाटी और बूब्स दबाने का काम करते थे. और वो सब मेरी शैतानी नजरों से छिपा नहीं रहता था. इसे सयोंग कहे की किस्मत मेरा मन निर्मला भाभी की शादी के पहले से ही उसकी चुदाई करने को बना हुआ था. लेकिन मैं डरता था की कहीं अनिल को पता चला तो वो बुरा मान जायेंगा. मैंने अक्सर निर्मला भाभी के बारें में सोच के अपने लंड के पानी को बाथरूम में निकाला था.

देखते ही देखते शादी हो गई अनिल की और मेरी चुदाई के सपने चुद गएँ. शादी वाली रात मैंने ही अनिल को दरवाजे तक छोड़ा था और मैं मनोमन उस से जल रहा था की साला इसे बढ़िया पिस मिल गया हैं.

सुहागरात मना के जब अनिल निचे आया तो मैं और वीर निचे ही थे. मुझे देख के उसने आँख मारी और हंस पड़ा. वीर को कुछ काम था इसलिए वो उठ के गया. अनिल आके मेरे पास बैठा और उसने मेरी और देखा. मैंने उसे धीरे से कहा, “मुफ्त की पहली चुदाई कैसी रही?”

“साले मुफ्त की थोड़ी हैं डेड ने शादी में 10 लाख खर्चा किया हैं तो ऐसा बोल के जिन्दगी की सब से महंगी चुदाई कैसी रही.” उसने धीरे से कहा.

वो आगे बोला, “बड़ा सही पिस हैं यार. उसके साथ तो पूरी रात खींचातानी रही. उसने अपने कोलेज के अफेर के बारे में भी बताया. बड़ी वाइल्ड हैं तेरी भाभी तो…!”

मेरे मन में यह सब सुन के और भी जलन होने लगी. उसकी चुदाई की बातें तब तक चली जब तक निर्मला भाभी को सुहासिनी दीदी (अनिल की बड़ी बहन) निचे ले के नहीं आई. लेकिन लास्ट में जो बात अनिल ने कही उस से मेरा दिमाग चकरा गया, “काश तू अपनी भाभी की चूत देख सकता तो तुझे पता चलता की वो कितना बड़ा माल हैं.”

मैं कुछ नहीं बोला; लेकिन मुझे इस लाइन से यह पता चल गया की अनिल के मन में सॉफ्ट कोर्नर हैं और अगर मैं थोडा प्रयास करूँ तो भाभी की चुदाई का जुगाड़ हो सकता था. मैंने मनोमन अनिल की मदद से निर्मला भाभी की चुदाई का प्लान उसी वक्त वही बैठे बैठे बनाया. अनिल एक नंबर का शराब का शौकीन हैं और उसकी यही आदत का मैंने फायदा उठाने का नक्की कर लिया.

अनिल की शादी को अभी २ हफ्ते ही हुए थे और मैंने उसे अपने फ्लेट पे बुलाया. शाम का वक्त था और किंगफिशर की दो बोतलें खुली और साथ में मैंने बोइल्ड सिंग और तले हुए काजू का चखना रखा हुआ था. अनिल को थोड़ी पिलाई और मैंने निर्मला भाभी की बात निकाली. अनिल को चढ़ी नहीं थी अभी लेकिन मैंने जानता था की वो निर्मला से शादी कर के बड़ा खुश हैं और वो उसकी बातें मुझे जरुर बतायेंगा.

अनिल: अरे मत पूछ यार उसके बारे में. बड़ी क़यामत चीज हैं teri भाभी. रोज अपना पल्लू उठा के पहले अपने चुंचो का रसपान कराती हैं और फिर अपनी चूत की चुदाई में मुझे मग्न करती हैं. सच में यार हमने आजतक जितनी चूतें मारी हैं उसमे से ऐसी गरमी किसी के भी अंदर नहीं थी. बड़ा कस के दबाती हैं लौड़े को अपने छेद के अंदर जब झड़नेवाली होती हैं. अनिल की बात सुन के मेरा लंड खड़ा होने लगा था और मैंने सोचा की मूठ नहीं मारी तो मजा नहीं आयेंगा. मैंने अनिल को कहा की मैं मूत के आता हूँ और बाथरूम में मैंने निर्मला भाभी के नाम की मूठ मार ली. वापिस आके मैंने बियर को वापिस अपने होंठो पे लगाया. अनिल मेरे सामने देख रहा था और उसके हाथ के काजू को वो मुहं में डाल रहा था.

अनिल: सच बता तू अभी मूठ मारने के लिए गया था ना?

यह मेरे प्लान का हिस्सा नहीं था लेकिन समझाऊ अनिल यह जान गया. मैं कुछ नहीं बोला और उसने आगे कहा, “यार मैं चाहता हूँ की तू एकबार निर्मला से सेक्स करें. ज्यादा नहीं बस एक बार…!”

मैंने मनोमन कहा अरे मैं भी यही चाहता हूँ मेरे भाई अनिल की तू अपनी बीवी की चुदाई करने में मेरी एकबार हेल्प कर दे बस. अनिल ने बियर को गले के निचे उतारा और बोला, “क्या हुआ तू चुप क्यों हो गया?”

मैंने निराश होने वाले आवाज में कहा, “अरे यार मेरे नसीब में कहाँ ऐसा सुख हैं अभी…!”

अनिल बोला, “चल मैं ट्राय करता हूँ कुछ जुगाड़ करने का. तू एक काम कर गाडी निकाल तेरी. हम लोग मेरे घर चलते हैं. वैसे भी सब लोग बहार जाने वाले थे निर्मला को छोड़ के. आज मौका अच्छा हैं अगर निर्मला मान गई तो मजे कर सकते हैं थोड़े हम लोग.”

मेरे मन में निर्मला भाभी की चुदाई के सपने आने लगे थे और रास्ते में मुझे वही विचार आ रहे थे. गाडी चलाते चलते भी मैं बस वही सोच रहा था. अनिल का घर आया और मैं निचे ड्राइंग रूम में बैठा. वो फट से ऊपर गया; शायद निर्मला भाभी को प्लान बताने के लिए. पूरी दस मिनिट ले ली उसने निचे आने में. सीडी के ऊपर से ही उसने मुझे इशारा किया उपर आने के लिए. सीडी के ऊपर हम दोनों इकठ्ठे हुए तो वो हंस के बोला, “तेरी भाभी मान गई हैं दो लंड से चुदने के लिए. लेकिन उसने कहा की मैं तुझ से यह प्रोमिस लू पहले की यह किसी को बतायेंगा नहीं.”

मैंने अनिल को कहा, “अरे आजतक हमारी बात बहार आई हैं कभी.”

हम दोनों अंदर कमरे में गए. निर्मला भाभी आयने के सामने खड़ी हुई अपने होंठो पे लिपस्टिक लपेड रही थी. मुझे देख के वो बोली, “आओ देवर जी; हमारे गरीबखाने में.”

मैंने कहा, “भाभी आप जैसे लोग गरीब होने लगे तो बेचारे असली गरीब को क्या कहेंगे.”

निर्मला भाभी ने ठठ्ठा लगाया और उसकी बड़ी गांड हंसी के साथ हिलने लगी. भाभी पलंग के ऊपर आ बैठी और अनिल के सामने देखा. अनिल ने मुझे इशारा किया की मैं भी पलंग के ऊपर बैठ जाऊं. भाभी ने मेरी तरफ देखा और बोली, “बड़े शैतान हो दोनों भाई. लेकिन मुझे अच्छा लगा आप लोगों की दोस्ती देख के.”

मैं भाभी के करीब बैठ गया और वो मेरे छाती वाले भाग पे अपना हाथ चलाने लगी. अनिल ने दरवाजा खिंचा और स्टोपर लगा दी. निर्मला भाभी मेरे बगल में ही थी और मेरी साँसों की बढ़ने की आवाज शायद उसे आ ही गई होंगी. अनिल वापस आया और हम दोनों की और देखा. निर्मला भाभी ने पहले अनिल और फिर मेरी और देखा और बोली, “चलो पहल कौन करेंगा यह तो बताओ…?”

अनिल ने  मुझे इशारा किया. मेरा दिल जोर जोर से धडक रहा था भाभी की तरफ हाथ बढाते हुए. अनिल वही बैठ गया और वो मुझे और निर्मला भाभी को देखने लगा. मैंने अपने हाथ को निर्मला भाभी की बड़ी चुंची पे रख दिया और उसे हलके से दबा दी. निर्मला भाभी की चुंची मस्त सॉफ्ट थी और उसे दबाते ही उसके मुहं से एक सिसकी निकल पड़ी. मेरा हाथ फिर थोड़ी रुकने वाला था. मैंने अपने दुसरे हाथ को भी चुंची के ऊपर लगा दिया और अब दोनों चुंचियां मैं अपने हाथ से दबाने लगा. निर्मला भाभी ने पतला गाउन पहना था और उसकी ब्रा का अहसास मुझे अच्छे से हो रहा था. मैंने चुंचियां 1 मिनिट दबाई और फिर भाभी ने मेरे हाथ हटा के अपने गाउन को उपर उठाया. सच में वो चुंचियां मस्त बड़ी और गोल थी; जो अभी सफ़ेद ब्रा के पीछे छिपी बैठी थी. भाभी ने जैसे ही अपने हाथ पीछे कर के अपना ब्रा खोला मेरे मुहं में उनकी बड़ी बड़ी निपल्स देख के पानी आने लगा. मैंने भाभी की चुंचियां अपने मुहं के पास रखी और उन्हें चूसने लगा, इतने में अनिल भी खड़ा हो गया और उसका लंड भी.

अनिल ने अपनी पेंट से लौड़े को बहार निकाला और भाभी के मुहं के सामने रख दिया. मैंने भाभी की चुंचियां चूसना बंध किया और भाभी ने अनिल का लंड मुहं में ले लिया. अनिल की आँखे बंध थी और वो अपनी गांड को आगे पीछे कर के लंड को मुहं में चलाने लगा. यह हॉट सिन देख के मेरा लौड़ा भी चुदाई के लिए जैसे की पागल हो रहा था. अनिल का काला मोटा लंड भाभी के गोरे मुहं में मस्त चल रहा था. मैंने उठ के अपनी पेंट निकाली और अंडरवेर भी उतार फेंकी. निर्मला भाभी ने लंड चूसते चूसते मेरे सामने देखा और अपनी टाँगे फैला दी. मैं समझ गया की भाभी अपनी चूत चूसवाना चाहती थी. मैं उसकी टांगो के पास आ बैठा और मुझे देख के अनिल थोडा साइड में हो गया. मैंने अपने होंठ भाभी के चूत के सामने रखे और पहले हलके से एक किस किया, मेरी नाक में भाभी के पिशाब की खारी सुगंध भर सी गई. लेकिन मुझे तो जैसे उस से और भी उत्तेजना हो रही थी. मैंने अपनी जीभ को भाभी की चूत के अंदर डाली और उसके होंठो को अपनी जीभ के लपलपाने लगा. निर्मला भाभी के मुहं में अनिल का लंड था इसलिए शायद वो आह भी नहीं कर पाई.

अनिल भाभी के मुहं में लंड देता गया और मैंने चूत का पानी निकाल दिया था उसे चूस चूस के. अब मुझ से जरा भी रहा नही गया. मैंने चूत की चुसाई को छोड़ा और सोचा की अब चुदाई में ध्यान देते हैं. मैंने अपने लौड़े के सुपाड़े के ऊपर थूंक मला और भाभी की टाँगे फैला दी. भाभी ने अपनी उँगलियों से चूत के होंठो को खोला जिस से उसके चूत के अंदर की लाली साफ़ नजर आ रही थी. मैंने अपने लंड के सुपाड़े को सेट कर के एक जोर का झटका दिया और भाभी की बूर में अपना लंड पेल दिया. सच में जैसे अनिल ने कहा था वैसे ही भाभी की चूत मस्त टाईट और गरम थी. उसकी चूत के होंठो ने जैसे मेरे लौड़े को अंदर दबोच लिया था. निर्मला भाभी अभी भी अनिल के लौड़े को अपने मुहं से मजा दे रही थी और इधर वो मेरे लंड को अपनी चूत में फसाये हुए थी.

अनिल भी अपनी मस्ती में मस्त था और वो निर्मला भाभी के बालों को पकड के उनके मुहं को जोर जोर से पेल रहा था. अनिल के जैसे ही मैंने भी अपनी कमर को हिलाना चालू कर दिया और अपने लंड को भाभी की चूत के अंदर जोर जोर से अंदर बहार करने लगा. निर्मला भाभी भी बड़ी मस्ती में आ गई थी और वो अपनी गांड को आगे पीछे कर के मुझे और भी मजे दे रही थी. मुझे लग रहा था जैसे की मैंने आठवें आसमान में हूँ जहाँ यह भाभी कोई अप्सरा हैं. मेरी सांस उखड़ रही थी और पसीना भी बहोत हो रहा था. लेकिन निर्मला भाभी ने मेरे लंड के ऊपर अपनीचूत की पकड वैसे ही मजबूत बनाई हुई थी. दो मिनिट की और चुदाई में तो जैसे मेरे लंड की साँस निकल गई. भाभी की चूत के अंदर वीर्य निकल गया और भाभी ने चूत को और भी टाईट कर लिया. इस टाईट चूत के अंदर मेरा वीर्य एक एक बूंद कर के निकल गया. मैंने लंड निकाला और मैं वही बैठ गया. इसके बाद अनिल ने अपना लंड भाभी की चूत में दिया और उसने भी भाभी की चुदाई मेरे सामने ही कर दी.

इस चुदाई के बाद कुछ दिन तक मेरी हिम्मत नहीं हुई की अनिल से फिर अपनी बीवी की चूत देने को कहूँ. लेकिन फिर एक दिन जब मैंने उसे पूछा तो वो मुझे ख़ुशी ख़ुशी अपने घर ले आया. निर्मला भाभी भी दो लंड अपनी चूत और गांड में आराम से ले सकती हैं इसलिए उसे भी इस से कोई ऐतराज नहीं हैं.