देवर को दिया चूत मजा

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मेरा नाम गौरव है। मैं अभी कॉलेज से पास आउट हूं। इसलिए घर में फिलहाल खाली ही बैठा हुआ हूं। मैंने अपना छोटा मोटा स्टार्ट अप करने की कोशिश की लेकिन वह हो नहीं पाया। इस वजह से मैं फिलहाल घर पर ही बैठा हूं और मेरे घर में मेरे एक बड़े भैया है। जो कि मुझसे कुछ साल ही बड़े हैं। मेरे पिताजी भी इसी साल रिटायर हो रहे हैं। तो वह सोच रहे थे कि रिटायरमेंट से पहले वह एक घर ले ले। अब उन्होंने एक घर भी ले लिया है और वह भैया की शादी भी करवाना चाहते हैं। उन्होंने भैया से इस बारे में बात भी करी। की क्या तुम शादी करना चाहते हो। तो मेरे भैया उनकी बात को टाल नहीं पाया और वह कहने लगे ठीक है पिताजी जैसा आपको उचित लगता है आप उस तरीके से देख लीजिए। उन्होंने शादी के लिए हां कह दी। मेरे भैया का नाम अशोक है और वह एक बहुत ही सीधे साधे इंसान हैं। वह मेरे पिताजी की किसी भी बात को मना नहीं करते और उनकी हां में हां मिलाते रहते हैं। जिस वजह से उन्हें घर मे सब बहुत अच्छा मानते हैं और मुझे सब लोग थोड़ा नटखट मानते हैं। क्योंकि मैं बचपन से ही बहुत शरारती था और मेरी हरकतों की वजह से कई बार मेरे पिताजी को भी शर्मिंदगी हो जाती थी लेकिन अब मैं बड़ा हो गया हूं और काफी समझदार भी हो गया हूं। इसलिए वह मुझसे बहुत ही अच्छे से बात करते हैं और मुझे बहुत समझाते रहते हैं, कि बेटा लाइफ में कुछ अच्छे से काम करो। जिससे तुम्हारा एक अच्छा नाम होगा समाज में। तुम्हारा नाम भी होना जरूरी है। मैं उनकी इस बात में हमेशा उन्हें यही कहता कि पिताजी समय के साथ सब कुछ हो जाएगा। आप उसकी चिंता ना करें। मैं बहुत ज्यादा मेहनत कर रहा हूं और कुछ ना कुछ तो हो ही जाएगा। यह सुनकर वह भी बहुत खुश हो जाते।

कुछ दिनों बाद हमारे घर पर एक पंडित जी आए और वह  भैया के लिए बहुत सारे रिश्ते लेकर आए हुए थे। पिताजी ने जब भैया को उन लड़कियों की फोटो दिखाई तो भैया ने मुझे भी वह फोटो में दिखाई। मुझे तो उनमें से कोई भी लड़की पसंद नहीं आ रही थी और मैं यही सोच रहा था कि पता नहीं भैया का क्या होगा। फोटो देखने के बाद पिताजी ने पंडित जी को मना कर दिया। उनको उनमे से कोई भी पसन्द नही आई और कहने लगे कि तुम दोबारा दूसरी फोटो ले आना। फिर उसमें से हम किसी लड़की को पसंद कर लेंगे। उसके बाद आगे देखते हैं क्या करना है। कुछ दिनों बाद वही पंडित हमारे घर पर दोबारा से आए और उन्होंने अब कुछ अच्छी लड़कियों की फोटो दिखाएं। इनमें से भैया को एक लड़की बहुत ज्यादा पसंद आ गई और भैया ने पिता जी से इस बारे में बात की। तब वह कहने लगे ठीक है। हम लोग इस लड़की के बारे में पता कर लेते हैं। पंडित जी से उसके बाद आगे रिश्ते की बात बढ़ाते हैं। अब पिताजी ने पंडित जी से पूछा तो वह कहने लगे कि उनका बहुत ही अच्छा परिवार है। और आप वहां पर शादी के लिए हां कर दीजिए। वह लड़की भी एक गवर्नमेंट जॉब पर है। यह सुनकर पिताजी बहुत ज्यादा खुश हो गए और उन्होंने रिश्ते के लिए तुरंत ही हां कर दी। जैसे ही पिता जी ने रिश्ते के लिए हां कही तो उन्होंने भैया को भी इस बारे में बता दिया था। बाद में उन्होंने मुझे भी इस बारे में बता दिया। अब रिश्ता तय हो चुका था। तो सब लोग बहुत खुश थे और शादी की तैयारियों में लगे हुए थे।

पिताजी ने कार्ड भी बहुत अच्छे से छपवाए थे। क्योंकि हमारे घर पर यह पहली शादी थी। इस वजह से उन्होंने किसी भी तरीके से खर्चे में कोई भी कंजूसी नहीं की थी। उन्होंने दिल खोलकर सारे खर्चे किए थे। वह बहुत ज्यादा खुश भी थे और हम लोग भी बहुत खुश थे। अब भैया की शादी का दिन नजदीक आ गया और हमारे सारे रिश्तेदार हमारे घर पर आने लगे। उनके लिए अलग से एक  गेस्ट हाउस भी करवा रखा था। जिससे कि उनको किसी भी तरीके से कोई भी परेशानी ना हो। वह हमारे घर के पास में ही था। हमारे जितने भी रिश्तेदार थे सब बहुत खुश थे। वह कहने लगे कि आप लोगों ने बहुत ही अच्छे से बंदोबस्त किया है। हमें बहुत ही अच्छा लग रहा है। आपने इस तरीके से बंदोबस्त किया हुआ है। पिताजी ने भी साफ कह दिया था कि मुझे किसी भी प्रकार से कोई भी कमी नहीं चाहिए। शादी में जितना खर्चा होता है उतना हम लोग करेंगे लेकिन हमें किसी भी तरीके से कोई कमी नहीं होनी चाहिए। इसलिए हम लोगों ने बहुत ही अच्छे से सब कुछ मैनेज करवा रखा था। उस शादी में मुझे एक लड़की दिखी। मुझे उसका नाम भी नहीं पता था लेकिन मेरे अंदर बहुत उत्सुकता हो रही थी कि मैं उसके बारे में जानकारी इकट्ठा करूं लेकिन मैं शादी के कामों में बिजी भी था  इस वजह से मैं उससे ज्यादा बात भी नहीं कर पा रहा था। तब मैंने अपनी मौसी की लड़की से कहा कि तुम इसके बारे में पता करो कि यह कहां की रहने वाली है और हमारे रिश्ते में आती है या नहीं। उसने जब उसके बारे में पता करवाया तो उसका नाम आशा था और वह हमारे ही रिश्ते में लगती थी। यह बात सुनकर मैं बहुत खुश हूंआ।

मेरी मौसी की लड़की ने उससे बहुत ही अच्छे से दोस्ती कर ली थी और उसने हम दोनों को मिलवा दिया। मैं जब आशा से मिला तो मुझे उससे मिल कर बहुत ही अच्छा लगा। वह एक बहुत ही अच्छी लड़की थी। मैंने जब उसके बारे में पूछा तो वह कहने लगी कि वह  कोई कोर्स कर रही है। मैं यह सुनकर बहुत ही खुश हूंआ। मेरी उससे बातें भी होने लगी। वह भी मेरे साथ शादी के कामो में मेरी मदद करने लग गई और कहती कि तुम्हें जब भी कुछ भी मदद की आवश्यकता हो तो तुम मुझे बता देना। मैंने उसे कहा ठीक है। मैं तुम्हें बता दूंगा। उसने शादी में मेरी बहुत ज्यादा मदद की।

मैंने उसको कहा कि मुझे एक काम है तुम कमरे में चलो। वह मेरे साथ रूम में आ गई मैंने उसे कहा कि तुम वह सामान ऊपर से निकाल दोगी क्योंकि मेरा वजन थोड़ा ज्यादा है इसलिए मैं नहीं चढ़ पा रहा हूं। मैंने उसे अपनी गोदी में उठा लिया और वह सामान उसने निकाल कर मुझे दिया जैसे ही वह सामान निकाल रही थी तो हम दोनों नीचे गिर पड़े। उसने गाउन पहना हुआ था वह ऊपर उठ गया और उसकी पैंटी को देखकर मैंने तुरंत ही उसकी चूत पर हाथ रख दिया और उसे रगड़ने लगा वह गीली हो गई। मैंने उसके होठों पर किस कर लिया और उसके स्तनों को किस करने लगा मैंने काफी देर तक ऐसा करने के बाद उसकी पैंटी उतारते हुए चाटना शुरु कर दिया। मैंने बहुत देर तक उसकी चूत को चाटा और मैंने उसके दोनों पैरों को खोलते हुए अपने लंड को उसके योनि के अंदर डाल दिया जैसे ही मैंने अपना लंड डाला तो उसकी चीख निकल पडी और मैं उसे ऐसे ही चोदना लगा मुझे बहुत मजा आ रहा था। जब मैं उसे चोद रहा था मैं उसके स्तनों को देखकर बहुत खुश हो रहा था और उन्हें अपने मुंह के अंदर ले लेता। मैंने उन पर बहुत ज्यादा जोर से दांत काट दिया जिससे कि उसके स्तनों से खून बहने लगा था और मैंने उसके निप्पल को चूस चूस कर बहुत ज्यादा सख्त कर चुका था। वह मुझे कहती तुम तो मेरे बॉयफ्रेंड से भी अच्छी तरीके से मुझे चोद रहे हो। मुझे यह बात पता चली उसका बॉयफ्रेंड भी है तो मैंने उसके दोनों पैरों को ऊपर करते हुए उसके चूतड़ों पर बड़ी तेजी से प्रहार करना शुरू किया। अब वह बड़ी तेज चिल्लाए जा रही थी लेकिन मैंने उसे छोड़ने का नाम नहीं लिया और ऐसे ही झटके दिए जा रहा था। मैंने उसे कम से कम आधे घंटे तक ऐसे ही चोदता रहा मेरा भी छिल चुका था और उसकी चूत भी पूरी छिल चुकी थी लेकिन मेरा अभी मन नहीं भर रहा था। मै  उसे ऐसे ही चोदे जा रहा था मैंने बड़ी तेज तेज झटके मारने शुरू किए। मैंने अपने लंड को बाहर निकालते हुए उसके मुंह के अंदर डाल दिया और वह ऐसे ही चुसती जा रही थी। उसने बहुत देर तक मेरे को चूसना जारी रखा जिससे कि मेरा वीर्य उसके मुंह के अंदर ही गिर गया और अब मुझे बहुत शांति मिली। मुझे ऐसा लगा कि कितनी दिनो बाद ऐसी शांति मिली हो। हम दोनों अब बाहर आ गए और घर के काम करने लगे।