गाय या भैंस-1

desi kahani सुनील एक कसरती बदन का तंदरुस्त नौजवान लड़का था। उसकी उम्र कुछ 18 साल की थी और वो अपने माँ और पिताजी के साथ कानपूर शहर में रहता था। उसका पुश्तैनी गाँव कानपूर शहर से बीस किलोमीटर की दूरी पर था, पर सुनील के पिताजी ने गाँव की सारी सम्पति बेच-कर शहर में ही मकान ले लिया था। उनकी खुद की सरकारी नौकरी थी और उनका एक खुश मध्यम वर्गीय परिवार था। इसी साल सुनील की दीदी की शादी हुई कानपूर शहर में ही एक इंजीनियर के यहाँ हो गयी थी। दीदी के जाने के बाद सुनील के परिवार में सिर्फ सुनील, उसकी माँ और पिताजी थे।

परिवार के सदस्यों का परिचय:
श्याम: 50 साल, पिता
सुधिया: 47 साल, माँ
सुनील: 18 साल, बेटा
मधु: 27 साल, दीदी (शादीशुदा)

सुनील की माँ एकदम गोरी-चिट्टी और भरे बदन (44 – 38 – 44) की मिलनसार स्वाभाव की महिला थीं। उनके मोहल्ले की सभी औरतों से अच्छी पटती थी और सभी उनके हुस्न की तारीफ किया करती थीं। इस उम्र में भी उनके बदन का कसाव किसी 18 साल के लड़के के लिए भी काफी था। मोहल्ले के सभी लड़कों ने आपस में उसका नाम दूधिया (क्यूंकि उसके स्तन बहुत बड़े थे) रखा हुआ था। वो सभी सुनील के घर आने के बहाने ढूंढते रहते थे ताकि उन्हें उनकी दूधिया के दूध के दर्शन हो जाए। जब तक मधु की शादी नहीं हुई थी वो इन लड़कों आने नहीं देती थीं क्यूंकि वो खुद भी उसके उम्र के हिसाब से खासी गदराई हुई थी और उसे पता थी क्यों सुनील के दोस्त घर आने को लालायित रहते हैं। सुनील इन बातों से अनजान था, वो बराबर अपने दोस्तों को अपने घर बुला कर उनके साथ पढाई और क्रिकेट देखा करता था।

मधु की शादी होने में बड़ी दिक्कत आयी थी क्यूंकि उसका रंग थोड़ा साँवला था। वैसे तो उसने पढाई अच्छे से की थी, पर ज्यादार लोग उसके रंग को देख-कर रिश्ते के लिए मन कर देते थे। आखिर में एक फॅमिली तैयार हुई, लड़का (राहुल) इंजीनियर था पर उसकी उम्र महज 22 साल की थी। राहुल के घर में राहुल के अलावा सिर्फ उसकी एक विधवा माँ थी। सुनील के पिता श्याम के लिए ये मुश्किल निर्णय था। पर राहुल 22 साल के उम्र के हिसाब से काफी mature था और श्याम और सुधिया दोनों उसकी बातों से इम्प्रेस्सेड थे। दरअसल राहुल ने खुद ही मधु की मैट्रिमोनियल प्रोफाइल को लाइक किया था। जब राहुल की माँ ने उम्र के फासले को लेकर आपत्ति जताई तो राहुल ने जिद करके अपनी बात मनवा ली। शादी से पहले मधु ने एक बार राहुल से मिलना चाहिए, वो भी मिलना चाहती थी राहुल से क्यूंकि उसे कितने लोगों ने उसके रंग की वजह से नकार दिया था और राहुल जो की खुद गोरा था, और संपन्न फॅमिली थी जिसकी, क्यों इस शादी को राज़ी था। मिलने पे राहुल ने मधु को फिर इम्प्रेस्सेड कर दिया और आखिर दोनों की शादी हो गयी।

शादी की रात ही मधु को पता चल गया की उसकी शादी गलत व्यक्ति से हो गयी है। दरअसल राहुल और उसकी माँ (रजनी) के नाजायज़ सम्बन्ध थे। शादी की रात भी राहुल ने मधु को रजनी माँ पुकारते हुए ही छोड़ा था। राहुल अपनी माँ को पिछले 6 साल से चोदता आ रहा था। उसकी पूरी परवरिश बड़ी उत्तेजित माहौल में हुई थी। उसकी माँ उसे हमेशा अपने भरे बदन (42 – 36 – 42 ) से चिपका के रखती थी। उसके पिता की पोस्टिंग हमेशा दुसरे शहरों में रही। पहले तो माँ-बेटा पिता के साथ-साथ जहाँ जहाँ पोस्टिंग होती थी वहाँ जाते थे पर राहुल के इंटर पास करने के बाद (उसी साल राहुल ने अपनी माँ के बदन को पहली बार भोगा था) दोनों कानपूर वाले घर पे रहने आ गए। राहुल के पिता की उसके एक साल बाद ही रोड एक्सीडेंट में डेथ हो गयी। राहुल की माँ दुनिया के लिए बेवा हो गयीं, पर अपने बेटे के प्रति उनका प्यार और बढ़ गया। घर के अंदर दोनों पति-पत्नी की तरह रहते थे। राहुल पढाई में बहुत अच्छा था, और अपनी माँ के बदन के सानिध्य ने उसकी पढाई को और अच्छा कर दिया था। वो या तो पढाई करता था या अपनी रजनी की ठुकाई।

किसी भी तीसरे काम में उसकी कोई रूचि नहीं थी। बारहवीं के बाद एक दिल्ली के अच्छे इंजीनियरिंग कॉलेज में उसका नामांकन हो गया पर उसे कानपूर छोड़ के दिल्ली आना पड़ा। वो अपनी माँ को भी अपने साथ दिल्ली ले आया और एक फ्लैट ले कर रहने लगा। जहां कॉलेज में उसकी उम्र के लड़के लड़कियों का पीछा करना, और उन्हें इम्प्रेस करने में लगे रहते थे, राहुल केवल पढाई में ध्यान देता था। दे भी क्यों नहीं, उसके पास 45 साल की उसकी माँ थी जिसे वो घर आते ही, रात में और फिर घर से निकलते वक़्त चोदता था। राहुल अपनी माँ को प्यार से गाय बुलाता था और हमेशा रजनी के स्तनों से दूध पीने को लालायित रहता था। रजनी भी बेटे का पूरा ख्याल रखती और ज्यादा से ज्यादा खुद को नंगी किये रहती। राहुल अपनी नंगी गाय को देख-कर ही उत्तेजित हो जाता था। इंजीनियरिंग के पूरे 4 साल यही चला और राहुल अच्छे मार्क्स से सारे एग्जाम पास कर गया।

इंजीनियरिंग के बाद राहुल को अच्छी नौकरी मिल गयी कानपूर शहर में ही और फिर वो अपनी गाय माँ के साथ कानपूर वाले घर पे ही आ गया। 4 साल के बाद दोनों माँ बेटे कानपूर आये थे। रजनी ज्यादा घुली-मिली नहीं थी आस-पास के घरवालों से और ज्यादा-तर खुद ही खुद में रहती थी। ऐसा ही राहुल भी था, उसके पास कोई भी दोस्त नहीं था जो की उसके घर आये। पर घर में नौकरानी (मालती) आती थी जो रजनी को आस-पास की बात बताती रहती थी पर रजनी को बिलकुल भी दिलचस्पी नहीं थी। राहुल और रजनी के संबंधों की भनक भी नहीं थी मालती को क्यूंकि वो बिलकुल माँ-बेटे जैसे रहते थे घर में।

इस बार जब 4 साल बाद रजनी और राहुल वापस कानपूर रहने आये थे, रजनी का बदन पहले से काफी फैल गया था। उसके स्तन और नितम्ब का विकास किसी को भी स्पष्ट दिख रहा था। मालती को भी उसकी मालकिन के बदन को देख-कर शक होने लगा, और वो जुगत में लग गयी की बात क्या है। घर में दो कमरे थे और मालती के रहते रजनी और राहुल अलग-अलग कमरे में होते। रजनी के एकदम से बढे बदन के अलावा कोई वजह नहीं थी की माँ-बेटे के रिश्ते पे शक किया जाए। पर मालती एक औरत थी और रजनी के बदन को देख-कर वो निश्चित थी की रजनी के बदन को किसी ने लम्बे समय तक भोगा था। सवाल तो बस ये था की क्या वो शख्स खुद उसका 22 साल का बेटा था!

माँ-बेटे जहां भी जाते, लोग उन्हें शक भरी नज़रों से देख रहे थे। चूँकि दोनों ही लोगों से खुले हुए नहीं थे कोई कुछ कह नहीं पा रहा था पर रजनी को देखते ही सभी दोनों के रिश्ते को संदेह की दृष्टि से देखने लगते।

कुछ ही दिनों बाद मालती ने रजनी से ये बात छेड़ दी – माँ जी आप लोगों के वापस आने के बाद मोहल्ले की सभी औरतें मुझसे एक ही बात पूछते हैं की क्या आपने फिर शादी कर ली क्या? पता नहीं क्यों सब यही पूछते हैं।

रजनी: क्यों, मैंने नहीं की है शादी, उन्हें क्यों लगता ऐसा! (वैसे रजनी को पता था की क्या वजह थी जो ये सवाल लोग पूछ रहे थे मालती से)

मालती: पता नहीं! मैंने सबको बता दिया की आपने शादी नहीं की है पर फिर भी नहीं मानतीं। खैर जाने दो!